मुस्लिम स्कूल की जमीन पर चल रहे डा० जाकिर हुसैन टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में 1130 सीटों में सिर्फ 250 मुस्लिम बच्चों का हुआ नामांकन 2018- नजरे आलम

मुस्लिम स्कूल की जमीन पर चल रहे डा० जाकिर हुसैन टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में 1130 सीटों में सिर्फ 250 मुस्लिम बच्चों का हुआ नामांकन 2018- नजरे आलम

मुस्लिम स्कूल की जमीन पर चल रहे डा० जाकिर हुसैन टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में 1130 सीटों में सिर्फ 250 मुस्लिम बच्चों का हुआ नामांकन 2018 से पहले के करोड़ों रुपये का हो चुका है घोटाला, ई०डी० और विजिलेंस से जांच की मांग शिक्षकों को दस महीने से नहीं दिया जा रहा वेतन, आवाज उठाने वालों को अंजाम भुगतने की दी जा रही धमकी दरभंगा: डा० जाकिर हुसैन टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, दरभंगा में 2006 से 2014 तक D.El.Ed, M.Ed और B.Ed. की कुल 1130 सीटों में सिर्फ 250 मुस्लिम बच्चों का ही नामांकन

लिया गया। 2018 से NCTE के तहत नामांकन लिया जा रहा है, लेकिन 2018 से पहले के नामांकन के नाम पर आए करोड़ों रुपये किस बैंक खाते में जमा किए गए उसका कहीं भी अता पता नहीं हैं।, कॉलेज में अभी तक एक भी जनरेटर नहीं है, लेकिन जेनरेटर के तेल के नाम पर भी लाखों रुपये का फर्जी बिल बनाया जा रहा है और करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है। कॉलेज के पास 350 सीट मौजूद है जिसकी आमदनी करोड़ों में होती है लेकिन शिक्षकों को वेतन देने के नाम पर कुछ लोग हमेशा शिक्षकों का शोषण करते नजर आते हैं। कॉलेज के शिक्षकों को दस-दस महीने तक वेतन नहीं दिया जाता है, जिस कारण बहुत से शिक्षक भूखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। हद तो यह है कि कॉलेज के सिर्फ पांच ही लोग ई०पी०एफ० से लाभान्वित हो रहे हैं और बाकी कर्मचारियों को

ई०पी०एफ० से भी वंचित कर दिया हैं। उपरोक्त बातें बताते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के अध्यक्ष, नज़रे आलम ने कहा कि यदि अल्पसंख्यक के नाम पर चलने वाली संस्था में ही अगर अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों का नामांकन नहीं लिया जाएगा और सीटों को मोटी राशि लेकर बेच दिया जाएगा तो फिर ऐसी संस्था से अल्पसंख्यक समुदाय का क्या फायदा। अल्पसंख्यकों के नाम पर चलाए जाने वाले इस कालेज को अरबों रुपये की आमदनी होती है, लेकिन चंद ही लोग मिलकर रूपया का बंदरबांट कर करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन गए हैं। नज़रे आलम ने विस्तार से बताते हुए कहा कि कॉलेज के प्रिंसिपल की बेटी जो अलीगढ़ में रहती है कालेज कभी नहीं आती है लेकिन नौकरी के नाम पर कॉलेज से वेतन पा रही है, आखिर कॉलेज प्रशासन ऐसा क्यों कर रही है? नज़रे आलम ने यह भी कहा कि अबसारूलहक नाम का एक व्यक्ति जो Reader के पद का पैसे लेता है, लेकिन एक दिन भी क्लास नहीं लेता है, कॉलेज प्रशासन मूक दर्शक क्यों बना हुआ है? उन्होंने कहा कि शफी मुस्लिम हाई स्कूल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में शहर के कई लोगों के नाम शामिल हैं। लेकिन कभी भी General Body की कोई बैठक नहीं बुलाई गई। हैरानी की बात है कि कोई General Body है ही नहीं, इसलिए जिसके मन में जो आ रहा वही घोटाला कर रहा है और कोई भी उन्हें रोकने वाला नहीं है। नज़रे आलम ने यह भी कहा कि शफी मुस्लिम हाई स्कूल के कैम्पस में बहुत सारे शैक्षणिक संस्थान चल रहे हैं जिससे सिर्फ चंद लोगों को फायदा पहुंच रहा है और दरभंगा से लेकर देश की राजधानी तक में करोड़ों की इमारतें और संपत्तियाँ बना रखी है। उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि शफी मुस्लिम हाई स्कूल के कैम्पस को आखिर किसके आदेश पर जाकिर हुसैन टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज द्वारा पार्टीशन किया

जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि कॉलेज की कुछ जमीन दरभंगा, बल्लोपुर में है जिसे प्राचार्य ने 99 वर्षों के लिए लीज पर ले रखा है। कॉलेज की जमीन प्राचार्य को किसके आदेश पर लीज किया गया कालेज प्रशासन को जवाब देना चाहिए। नज़रे आलम ने कहा कि कॉलेज में तीन से चार लोग हैं जो यह सोचकर करोड़ों रुपये का गबन कर रहे हैं कि कॉलेज उनकी बपौती में है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही ई०डी० और विजिलेंस के पास जाएंगे और अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे। नज़रे आलम ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यकों के नाम पर कालेज को बर्बाद करने वाले ऐसे माफियाओं के खिलाफ हर संभव लड़ाई लड़ी जाएगी और माफियाओं को अंजाम तक पहुंचाने तक चैन से नहीं बैठा जाएगा। उन्होंने आम लोगों से भी अपील करते हुए कहा के इस तरह के माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाएं वरना आने वाली पीढ़ियां ऐसे माफियाओं की गुलाम बनकर रह जाएंगी। नजरे आलम ने कहा कि कॉलेज को किसी भी परिस्थिति में नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा। कॉलेज में अच्छे लोगों की जरूरत है, कमेटी में भी बदलाव की जरूरत है ताकि कॉलेज और शफी मुस्लिम हाई स्कूल, जो मिल्लत की संपत्ति है, का ध्यान रखा जा सके और उसका सही इस्तेमाल किया जाए ताकि मिल्लत के लोग इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन को एक हफ्ते के भीतर कॉलेज के शिक्षकों के वेतन का भुगतान कर देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो मैं मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ इस विषय पर चर्चा करूंगा और कॉलेज को बचाने के लिए

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