सीएम लॉ कॉलेज के गेट से उर्दू मे लिखा हुआ नाम हटाया जाना कुछ डूबते नेताओ की गंदी राजनैतिक साजिश है डॉ मुन्नू खान .

सीएम लॉ कॉलेज के गेट से उर्दू मे लिखा हुआ नाम हटाया जाना कुछ डूबते नेताओ की गंदी राजनैतिक साजिश है .

न्यूज़ मे देखा और पढ़ा के सीएम लॉ कॉलेज के गेट पे हिंदी और उर्दू नाम प्लेट लगाया गया था |
बाद मैं उर्दू मे लिखा हुआ नाम प्लेट हटा दिया गया.

ये मामला हमारे ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के सीएम लॉ कॉलेज का है | *महाविधयालय ज्ञान का मंदिर होता है, इस लिए यहाँ ज्ञान वाली बात होनी चाहिए न की घटिया राजनीति* |

*अगर नाम प्लेट हिंदी और उर्दू मे लिखवाया गया तो इसमे बुराई किया है. ये सांस्कृतिक और संवेधानिक है. बिहार में उर्दू को दूसरी राज भाषा का दर्जा प्राप्त है। उर्दू भाषा किसी धर्म की भाषा नहीं है. ये हमारे देश की भाषा है. उर्दू भाषा बनी ही है सारे भाषाओ के मिश्रण से |*
इंग्लिश मे भी लिखवा देना चाहिए था तो बात खत्म हो जाती |

*सीएम लॉ कॉलेज का पुराना नाम प्लेट देखने से साफ़ पता चलता है के पहले भी सीएम लॉ कॉलेज का नाम इंग्लिश हिंदी उर्दू भाषा मे लिखा हुआ है, नई नाम प्लेट भी इंग्लिश हिंदी उर्दू मे लिखवा दिया जाए मसला खत्म |*

लेकिन ये तथा कथित नेता लोग मसला खत्म नहीं करना चाहते . पहले उन लोगो ने समस्या पैदा किया , बाद में घटिया राजनीति करने का एक मुद्दा बना लिया |

कुछ लोगो का ये भी कहना है के अगर उर्दू मे लिखा जाएगा तो मैथिली मे भी लिखा जाए कॉलेज का नाम |
ऐसे लोग बहुत घटिया मानसिकता के लोग है कियो की इन लोगो को हमारी मैथिलि भाषा से कोई प्रेम नहीं है. ये लोग हमारी मैथिल संस्कार को बदनाम कर रहे है |
ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के नाम प्लेट को आप जब देखयेगा तो पता चलेगा के नाम चार भाषाओ मे लिखी हुई है. 01. अंग्रेजी , 02. हिन्दी, 03. बंगाली, 04. उर्दू |
फिर आप ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के मैथिलि के पीजी डिपार्टमेंट का नाम प्लेट देखयेगा तो पता चलेगा के वो मैथिलि तो दूर हिंदी मै भी नहीं लिखा हुआ है बल्कि वो सिर्फ इंग्लिश मे लिखा हुआ है.
इस से तो एक बात अष्पष्ट है के इन लोगो को मैथिलि भाषा से कोई प्रेम नहीं है. बस अपनी राजनीति करनी है मैथिलि भाषा की आड़ मे |

इसका विरोद करने वाले सभी लोग बस हमारे मिथिला की पावन धरती पे अपने घटिया राजनीति कर रहे है. *ये लोग मानसिक रोगी है इनको रंग और भाषा मै भी विवाद दिखने लगा है | इनकी सोच कितनी नीच है आप इसी से अंदाज़ा लगा सकते है.*
*इन सब लोगो ने मिथिला की संस्कृति का अपमान किया है .*
कुछ तथा कथित नेता जो खुद को मिथिला का ठेकेदार समझते है, उनसे मैं बस यही कहूँगा के मिथिला राज्य का आंदोलन किसने ठन्डे बस्ते मे किसने डाला | मिथिला वासिओ से माफ़ी मांगे ये लोग |

मिथिला से मुझे प्यार है,और मैं मिथिला का ही सेवक हु | दिन रात अपने मिथिला वासिओ की सेवा मे लगा रहता हु |

*भाषा एक दूसरे को जोड़ने के लिए है , न की भाषा पे राजनीति कर के समाज को तोड़ने के लिए | उर्दू मेरा दिल है मैथिलि मेरी धड़कन और इंग्लिश मेरी आंख है |*
ये समय कोरोना वायरस से जंग लड़ने का है न की घटिया राजनीति करने का,
सरकार पूरी तरह विफल है इसको सँभालने में |

बाहर से आ रहे गरीब मज़दूरो के लिए सरकार बस और ट्रेन का इंतजाम करे जल्दी, आर्थिक मदद दे सरकार सब को, सरकारी कर्मचारीओ का वेतन समय पे दे , बिहार मे इंडस्ट्रीज खोले सरकार ,युवाओं के लिए रोज़गार दे, बिजली के बिल का रेट कम करे, महिला सुरक्षा दे, समय पे एग्जामिनेशन करवा कर उसका परिणाम समय पे दे | स्वास्थ्य विभाग पे धेयान दे सरकार . 12 करोड़ की आबादी में 250 भी वेंटीलेटर नहीं है |
अच्छा राजनेता बनने के लिए इनसब असल मुद्दे पे काम करना पड़ता है |
*सीएम लॉ कॉलेज के गेट से उर्दू मे लिखा हुआ नाम हटाया जाना कुछ डूबते नेताओ की गंदी राजनैतिक साजिश है |*
*इसका विरोध करना भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।*
*विरोद करने वाले के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करे महाविधयालय और पुराने नाम प्लेट्स मै जिस तरह इंग्लिश हिन्दू उर्दू था उसी तरह नई नाम प्लेट भी लगवाए |*…
धन्यवाद..डॉक्टर मुन्ना खान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don`t copy text!