ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में सभी परीक्षाओं को लेकर कुलाधिपति कुलपति और यूजीसी के गतिविधियों पर दरभंगा एनएसयूआई ने रखा अपना सुझाव

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में सभी परीक्षाओं को लेकर कुलाधिपति कुलपति और यूजीसी के गतिविधियों पर दरभंगा एनएसयूआई ने रखा अपना सुझाव

आज दरभंगा एनएसयूआई जिलाध्यक्ष त्रिभुवन कुमार ललित मिथिला विश्वविद्यालय परीक्षा नियंत्रक को आवेदन सौंप जिला अध्यक्ष त्रिभुवन कुमार ने कहा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में परीक्षाओं के मुद्दे पर कुलाधिपति कुलपति और यूजीसी अपना सक्रियता तेज किया है इस पर दरभंगा एनएसयूआई छात्र छात्राओं के हित को ध्यान में रखते हुए UG और PG सहित परीक्षाओं को प्रमोट करने का सुझाव दिया है और विश्वविद्यालय का सेशन लेट ना हो इस बात को भी ध्यान में रखते हुए अपना एक सुझाव पत्र परीक्षा

नियंत्रक महोदय को सोते हैं जिला अध्यक्ष त्रिभुवन कुमार ने कहा वह वैकल्पिक की जो बात कर रहे तो इस कोरोना काल में जहा एक तरफ पूरी तरह से शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है,प्रवेश, परीक्षा , परिणाम सब पूर्णतः प्रभावित है। ऐसे में राज्यपाल महोदय और यूजीसी के निर्देश पर शिक्षा व्यवस्था को पथ पर लाने हेतु माननीय कुलपति महोदय का प्रयास सराहनीय है। मगर इस संदर्भ में एक ऐसी बात है जिसको दरकिनार नहीं किया जा सकता है।
https://youtu.be/h2nn1mL3CKc
बहुविकल्पीय प्रश्न सब विषय के लिए उपयुक्त नहीं है, हम सब अवगत है कि स्नातक की परीक्षाओं में विभिन्न विषयों को समझकर किस तरह अपने सूझ बूझ से प्रश्नों को निर्धारित समय में निर्धारित शब्दो में लिखते है, छात्र तैयारी भी उसी हिसाब से करते है, और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता भी उसी तरह की मिलती है।अन्य विषयों में विकल्पीय प्रश्नों का ओचित्य एक हद तक सही भी हो सकता है लेकिन फिर भी गणित, वाणिज्य, साहित्य के विषयों में जहां लिखने की कला को देखा जाता है वहां अगर एकाएक बहुविकल्पीय प्रश्न का स्वरूप देखने को मिलेगा तो छात्र इतने कम समय में खुद को इस रूप में मानसिक रूप से तैयार करने में असमर्थ है क्योंकि एकाएक अध्ययन सामग्री की व्यवस्था होना मुश्किल है, विश्वविद्यालय में 70% से ज्यादा ऐसे छात्र है जो सुदूर गांव में रहते है उनकी हालत को देखकर एकाएक इस तरह का बोझ सहना सही नहीं होगा । दूसरी बात स्नातक के प्रथम द्वितीय सत्रों की अगर बात करें तो उनके लिए तो अगला सत्र पुनः से सुधार सकने की बात होगी लेकिन जो अंतिम वर्ष के छात्र है अगर उनके सामने इस तरह की चुनौती होगी तो इससे उनका परीक्षाफल प्रभावित होगा छात्र हित को रखकर न्यायोचित निर्णय लेने की कृपा करेंगे।

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