मखाना में मिथिला शब्द का जुडना अनिवार्य, होगी गौरव की बात– संजय सरावगी

मखाना  में मिथिला शब्द का जुडना अनिवार्य, होगी गौरव की बात– संजय सरावगी 

* जी आई टैगिंग में मिथिला शब्द जोड़ने को लेकर केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल ,मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री को लिखा पत्र

* मिथिला शब्द के जुड़ने को बताया अनिवार्य

* मखाना में मिथिला शब्द का जुड़ना होगी गौरव की बात

 दरभंगा । मिथिला के भौगोलिक एवं सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासत के साथ मखाना का संबंध रहा है और इसलिए मखाना में मिथिला शब्द का जुड़ना अनिवार्य है। यह दरभंगा व मिथिलांचल के लिए गौरव की बात होगी। जी आई टैगिंग में मिथिला शब्द जोड़ने को लेकर केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग 

 मंत्री, प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री को पत्र लिखे जाने के उपरांत बिहार विधानसभा में प्राक्कलन समिति के सभापति सह नगर विधायक संजय सरावगी ने यह बातें बताइ। श्री सरावगी ने कहा कि महामहिम को लिखे पत्र की प्रतिलिपि बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर,भागलपुर  के कुलपति को तथा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र की प्रतिलिपि प्रदेश के कृषि मंत्री एवं प्रधान सचिव कृषि विभाग को भेजी गई है। मखाना के जीआई टैगिंग में मिथिला शब्द जोड़ने को लेकर बिहार कृषि  विश्वविद्यालय सबौर ने मखाना जी आई टैगिंग के लिए मखाना फ्राॅम  बिहार के नाम का प्रस्ताव भेजा है। इस पर मिथिलांचल में काफी प्रतिक्रिया हो रही है। जिस मखान के साथ यहां के विरासत का इतिहास जुड़ा है, भूगोल जुड़ा है, भौगोलिक एवं सामाजिक संस्कृति जुड़ी है ,ऐसे में मिथिला के मखाना के साथ मिथिला शब्द का जुड़ना अनिवार्य है और यह निश्चित रूप से हमारे लिए गौरव की बात होगी। सभी प्रमुख लोगों को भेजे अपने पत्र में नगर विधायक ने कहा है कि मखाना भौगोलिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से मिथिला की सांस्कृतिक विरासत है और मिथिला नरेश राजा जनक के जमाने से पर्व त्यौहार से लेकर स्वागत सत्कार में मखाना का उपयोग होता रहा है ।मखाना का मिथिला में हजारों वर्ष का इतिहास है और इसे देश-विदेश पहुंचाने में लोकप्रिय बनाने में मिथिला के लोगों का योगदान है ।इसलिए इसकी मूल उत्पत्ति का क्षेत्र हजारों वर्षों से मिथिला ही है। वर्तमान समय में भी संपूर्ण देश के 75% मखाना का उत्पादन केवल मिथिला में ही हो रहा है ।आकेंद्रीय मंत्री महामहिम एवं मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में नगर विधायक ने कहा है कि भौगोलिक क्षेत्र की दृष्टि से दरभंगा, मधुबनी से पूर्णिया, कटिहार तक मिथिला का ही क्षेत्र है ।मिथिला की पहचान से जुड़े रहने के कारण केंद्र सरकार ने मखाना अनुसंधान केंद्र  का मुख्यालय दरभंगा को बनाया था। नगर विधायक ने अपने लिखे पत्र में कहा है  कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिथिला के मखाना की चर्चा की है तब से मिथिला के मखाना के प्रति देश एवं विदेशों में भी रुझान बढ़ा है ।प्रधानमंत्री ने भी अपने संबोधन में आत्मनिर्भर अभियान के प्रसंग में मिथिला मखाना की ब्रांडिंग तथा विदेश व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया था। ऐसी परिस्थिति में मखाना के जियो टैगिंग में मिथिला जुड़ना आवश्यक है बल्कि क्षेत्र के लिए गौरव की बात भी होगी। महामहिम को लिखे पत्र में श्री सरावगी ने कहा है कि मिथिला की जन भावना, सांस्कृतिक महत्व एवं उत्पत्ति के हजारों वर्ष के इतिहास को ध्यान में रखते हुए मिथिला मखाना के नाम से जीआई टैग होना चाहिए, इसे मखाना फ्रॉम बिहार के स्थान पर मखाना फ्रॉम मिथिला या मिथिला मखाना के नाम से जीआई टैग करने को लेकर बिहार एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय सबौर के कुलपति को निर्देश देने का अनुरोध महानुभावों से किया है।

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