स्वस्थ जीवन एवं आध्यात्मिक शक्ति का मूल स्रोत है योग : प्रो० (डॉ) विजय मिश्रा

स्वस्थ जीवन एवं आध्यात्मिक शक्ति का मूल स्रोत है योग : प्रो० (डॉ) विजय मिश्रा

मिल्लत कॉलेज मे हर्षोल्लास के साथ मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मिल्लत कॉलेज दरभंगा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें कॉलेज के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी तथा छात्र-छात्राओं ने बढ़- चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर

(डॉ ) विजय मिश्रा ने योग को स्वस्थ जीवन एवं आध्यात्मिक शक्ति का मूल स्रोत बतलाया। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं तथा शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों से योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का अनुरोध करते हुए कहा कि योग हमें न सिर्फ बहुत सारी बीमारियों से बचाता है बल्कि शरीर को चुस्त-दुरुस्त एवं ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है।

प्रोफेसर (डॉ) विजय मिश्रा ने विभिन्न प्रकार के योग तथा योगासनो की चर्चा करते हुए कहा कि योग दरअसल एक जीवन-दर्शन है, जो मनुष्य को आरोग्य एवं मानसिक शांति के साथ- साथ बौद्धिक तथा आध्यात्मिक चेतना प्रदान करता है। उन्होंने पूरे विश्व में योग दिवस मनाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की सदियों पुरानी वैज्ञानिक समझ तथा इसकी महान संस्कृति की विश्व स्तर पर स्वीकार्यता हम तमाम भारतीयों के लिए गर्व का विषय है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित योग गुरु श्री दीपक चौरसिया ने बतलाया कि योगासन तथा प्राणायाम से प्रायः सभी साध्य-असाध्य रोगों में काफी लाभ प्राप्त होता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह नित्य लगभग 30 – 40 मिनट खाली पेट योगासन तथा प्राणायाम करे। उन्होंने बताया कि योग मनुष्य को शारीरिक थकान, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, नसों एवं मांसपेशियों के खिंचाव के साथ – साथ पेट, सांस एवं रक्त संबंधी तमाम बीमारियों से मुक्ति दिलाता है।

विशिष्ट अतिथि योग गुरु श्री अरविंद कुमार ने विभिन्न प्रकार के योगासनों की जानकारी प्रदान करते हुए योग को शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नयन के लिए नितांत आवश्यक उपाय बतलाया।


इस अवसर पर डॉक्टर महेश चंद्र मिश्र ने योग को भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसके ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक पृष्ठभूमि का जिक्र किया तथा महर्षि पतंजलि के द्वारा शताब्दियों पहले बताए गए योगासनों के सटीक वैज्ञानिक आधार की विवेचना की।
कॉलेज के बर्सर डॉक्टर अताउर रहमान ने बतलाया कि योग की सहायता से हम प्रकृति के साथ साथ खुद के भी ज्यादा करीब हो सकते हैं साथ ही योग हमारी चेतना को बढ़ा कर हमारे अंदर आनंद तथा उत्साह का संचार करता है।
मोहम्मद अल्ताफ उल हक ने इस प्रकार के कार्यक्रम आगे भी करवाने पर जोर दिया जिससे छात्र छात्राओं को ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त हो सके।
डॉक्टर अयाज अहमद ने समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि आज के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से हम तमाम शिक्षकों,शिक्षकेतर कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं को काफी लाभ मिला है। उन्होंने सभी लोगों से आग्रह किया कि भविष्य में रोजाना योगाभ्यास करते हुए अपने आप को स्वस्थ रखने का काम करेंगे।
समारोह के दूसरे सत्र में लोगों को योग का प्रशिक्षण दिया गया जिसमें योग गुरु श्री दीपक चौरसिया तथा श्री अरविंद कुमार के मार्गदर्शन में तमाम लोगों ने एक साथ कई प्रकार के योगाभ्यास किए, जिसमें कपालभाति, अनुलोम- विलोम तथा भ्रामरी जैसे प्राणायाम तथा स्वस्तिकासन, सर्वांगासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, योगमुद्रासन, वज्रासन जैसे आसन प्रमुख हैं। दोनों योग गुरुओं ने विभिन्न प्रकार के योगासनों तथा प्राणायाम को खुद से प्रदर्शित कर तथा इसकी बारीकियों का स्पष्ट उल्लेख करते हुए लोगों को कई नई तथा व्यावहारिक जानकारियां दी तथा योगासनों के सही तरीकों से पूरी तरह अवगत कराया।
इस कार्यक्रम में डॉ रिजवान,श्री एनके मेहरा, मो. जलालुद्दीन मुजफ्फर, मोहम्मद इरशाद, रमाशंकर झा, डॉ मो. शमीम, मो. शायक, रमेश चौधरी, बंदना कुमारी, प्रीति पीटर, हारिस इकबाल, नसीरुद्दीन खान, राजेश मंडल, सरताज, रंजीत, मोहम्मद सलाउद्दीन खान, शौकत गव अली खान के साथ छात्र संघ के पदाधिकारी अमन नवाज खान, सरफराज अहमद, तथा काफी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

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