विश्व शान्ति दिवस के अवसर पर शांति मार्च का आयोजन


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विश्व शान्ति दिवस के अवसर पर शांति मार्च का आयोजन
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अमेज़ॅन वर्षावन में लगी आग को बुझाने के उद्देश्य से वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी द्वारा दरभंगा और मधुबनी के विभिन्न स्कूलों से निकाला गया विश्व शान्ति मार्च
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विश्व लोकतंत्र और वर्ल्ड पीस के लिए कार्यरत संस्था वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी के तत्वाधान में संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित ‘वर्ल्ड पीस डे’ के अवसर पर 21 सितम्बर 2019 को दरभंगा और मधुबनी के विभिन्न स्कूलों में शांति मार्च निकाला गया. डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, सारामोहनपुर में यह शांति मार्च प्रातः 8:57 मिनट पर प्रधानाचार्या सविता, डब्लू.एन.डी. प्रतिनिधि आतिका महजबीं, प्रधानाचार्य विद्यानाथ झा एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष जय शंकर झा के द्वारा हरी झंडी दिखाकर निकाला गया. शांति मार्च डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल से आयकर चौराहा, विश्वविद्यालय थाना होकर यूनिवर्सिटी कैम्पस में एक पेड़ के साये में संपन्न हुआ. इस अवसर पर डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल की प्रधानाध्यापिका सविता ने पीस मार्च के उद्घाटन संबोधन में डब्लू.एन.डी. प्रेसिडेंट एवं लेखक जावैद अब्दुल्लाह को इस शांतिमार्च के लिये धन्यवाद कहा. साथ ही सभी अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की. आगे अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अमेज़ॅन का संकट हो या पानी का संकट, अब हर संकट अंतरराष्ट्रीय समस्या बनती जा रही है. ऐसे में सभी पृथ्वीवासियों को एक होकर सोचना होगा. विश्व में शान्ति की स्थापना तभी हो सकती है जब हम सभी सौहार्द्र से रहें और पूरे विश्व को अपना परिवार समझें. विश्व शांति मार्च के निदेशक एवं लेखक जावैद अब्दुल्लाह ने अपने भेजे गये सन्देश में संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् एवं विश्व की तमाम सरकारों से यह सवाल रखा है कि हम यह किस प्रकार के वैज्ञानिक युग में जी रहे हैं,

जहाँ चन्द्रमा पर तो एक हफ़्ता में पहुँचा जा सकता है. लेकिन एक जंगल में लगी आग, या कहा जाये तो धरती के फेफड़े में लगी आग को एक महीनों में भी नहीं बुझा सकते. अतः मेरी एलेनोर रोसवैल्ट के शब्दों समस्त विश्व वासियों से अपील है, जैसा उन्होंने कहा है, ‘इट इज़ नॉट इनफ़ टू टॉक अबाउट पीस, वन मस्ट बिलीव इन इट. एंड इट इज़ नॉट इनफ़ टू बिलीव इन इट. वन मस्ट वर्क ऐट इट.’ ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संस्कृत विद्वान प्रोफ़ेसर जय शंकर झा ने अपने अतिथि संबोधन में कहा कि अब सम्पूर्ण विश्व समाज को अमन और शांति के लिये ऐसे ही प्रयासों की ज़रुरत है. जहाँ हम सभी के सुख दुःख को अपना समझें.‘अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् , उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्’. महोपनिषद के इस वैदिक सन्देश को अब हमें सम्पूर्ण विश्व सुनाना होगा. मुख्य-वक्ता के रूप में आये एम.एल.एस.एम. कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं वनस्पति शास्त्री प्रोफ़ेसर विद्यानाथ झा, ने अपने संबोधन में अमेज़ॅन के प्रमुख तथ्यों से बच्चों को अवगत कराया. उन्होंने कहा कि अमेज़ॅन वर्षावन में 40,000 से अधिक विभिन्न पौधों की प्रजातियां हैं और लगभग 2.5 मिलियन कीट प्रजातियां हैं.

40 वर्षों के दौरान, अमेज़ॅन वर्षावन का कम से कम 20% काटा गया है. यह अनुमान है कि अगर जलवायु परिवर्तन केवल 3 डिग्री सेल्सियस तक दुनिया के तापमान में वृद्धि करता है तो अमेज़ॅन का 75% नष्ट हो जाएगा. विश्व को 20 प्रतिशत ऑक्सिजन देने वाला और 10 प्रतिशत पृथ्वी की बायोडाईवर्सिटी को कण्ट्रोल करने वाला आज कई हफ़्तों से धधक रहा है. जिसके कारण हज़ारों पेड़-पौधे, और जीव-जंतु मारे जा रहे हैं. इस अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के माध्यम से लोगों को यह मालूम होना चाहिए कि प्रकृति की रक्षा ही शांति का मार्ग है. इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र संघ को वैश्विक स्तर पर ठोस क़दम उठाने चाहिए. क्योंकि अमेज़ॅन वर्षावन के सुरक्षा की ज़िम्मेदारी केवल ब्राज़ील, पेरू, बोलविया, वेनुज़ुएला आदि नौ देशों की नहीं है बल्कि यह ज़िम्मेदारी सभी विश्व नागरिकों की है. इसी क्रम में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम यूथ लीडरशिप अवार्ड से सम्मनित एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता फ़वाद ग़ज़ाली ने कहा कि…अंतरराष्ट्रीय शान्ति की स्थापना तब होगी जब विश्व के सभी नागरिक प्रकृति और इस पृथ्वी ग्रह के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को निभायें. और इस सन्देश के लिये बच्चे सबसे बेहतर दर्पण हैं. इस अवसर पर डी.ए.वी. की शिक्षिका नूतन, निधि, ए.एन. झा एवं अन्य शिक्षक/शिक्षिकागण उपस्थित थे. इस विश्व शान्ति मार्च का संचालन फ़वाद ग़ज़ाली एवं डी.ए.वी. शिक्षक राहुल कुमार ने किया. इस शांति मार्च में सकरी मधुबनी से साजिद अब्दुल्लाह, डब्लू. एन. डी. कार्यकर्त्ता सुमित कुमार, हरमैन अहमद एवं आतिफ़ अली ने पीस मार्च में भाग लिया. ज्ञात हो कि यह

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