सिविल एविएशन मंत्रालय का हास्यास्पद बयान, दरभंगा एयरपोर्ट के रनवे के निर्माण लिए नहीं मिल रहे एक्सपर्ट।

दरभंगा: एक तरफ भारत मंगल पर पहले ही प्रयास में पहुँच कर इतिहास रच चुका है। वहीं उसी देश में दरभंगा एयरपोर्ट के मामले में पूरी तरह से एक्सपोज हो चुकी उड्डयन मंत्रालय, अपने नाकामी को छुपाने को ले रोज नये बहाने ला रही हैं। एएनआई को दिये सूचना मे उड्डयन मंत्रालय के अधिकारी ने दरभंगा एयरपोर्ट के रनवे के लिए एक्सपर्ट्स ना मिलने का हवाला देते हुए, एयरपोर्ट पर रनवे का कार्य शुरू ना हो पाने की बात कही है।
उड्डयन मंत्रालय से हमारे सवाल

इस जानकारी पर हमारी टीम के मंत्रालय से कई सवाल हैं? रनवे निर्माण में एक्सपर्ट की कमी के कारण क्या दरभंगा के ही रनवे का काम अटका है, अगर नहीं तो देश के किन किन एयरपोर्ट का काम रनवे रिकार्पेटिंग के कारण अटका है? दूसरा सवाल अगर देश मे एक्सपर्ट की कमी है, तो विदेशों से लोग क्यो नहीं लाये गये? तीसरा सवाल यह है की, आखिर 24 जनवरी 2018 को स्पाइसजेट को दरभंगा एयरपोर्ट अवार्ड होने के साथ महीने बाद एक्सपर्ट ना खोज पाने का जिम्मेदार किसे माना जाये। चौथा सवाल रक्षा मंत्रालय से है, चीन से लड़ाई के समय सामरिक तौर दरभंगा के महत्वपूर्ण होने का दावा किये जाने वाले एयरपोर्ट के रनवे की स्थिति किस कारण इस हाल में पहुँच गई, जहाँ पर यहां लगातार विमान ही नहीं उतर सकते। क्या चाइना युद्ध समय ऐसे ही रनवे पर जहाजों को उतारा जाता, आखिर समय समय पर रनवे का रखरखाव रक्षा मंत्रालय द्वारा क्यों नहीं किया गया।

उड्डयन मंत्रालय नाकामी छुपाने को कर रहा है बहानेबाजी

रनवे निर्माण के लिए एक्सपर्ट ना होने की बात सिर्फ दरभंगा के लिए कहीं जा रही हैं, जो सिर्फ बहानेबाजी और नाकामी को छुपाने को ले समाने लाया रहा है। मालूम हो की जनवरी 2018 से ले अब तक रनवे और पोर्टा केबिन के चार टेंडर रद्द किये जा चुके है, जिसके कारण सात महीने बाद भी जमीन पर काम एक इंच भी नहीं बढ़ सका हैं। इन रद्द चार टेंडर मे तीन पोर्टा केबिन तो एक रनवे रिकार्पेटिंग से संबंधित है।

एयरपोर्ट के पोर्टा केबिन को ले हाल मे ही हमारी टीम ने उठाया था टेंडर और रिटेंडर के खेल का मुद्दा

मालूम हो की एयरपोर्ट के नाम पर पब्लिसिटी स्टंट मे कई नेता क्रेडिट लेने मे जुड़े थे, वहीं एयरपोर्ट के लिए जरूरी आधरभूत टर्मिनल की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी थी। हमारी टीम ने एयरपोर्ट के टेंडर और रिटेंडर के नाम पर चल रहे ड्रामे का पर्दाफाश किया था, जिसके बाद हरकत में आई एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 200 पन्नों का टेंडर निकाल, हमे टर्मिनल के टेंडर का काम सितंबर प्रथम हफ्ते तक पूरा कर लेने की जानकारी दी थीं। फिलहाल रनवे पर चल रहे नये खेल ने अधिकारियों की एक बार फिर पोल खोल कर दी है।

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