शिक्षक, शिक्षा और शिक्षालय बचाने के लिए संघर्ष होगा तेज

दरभंगा. टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के राज्यव्यापी आह्वान पर जिला के हजारों शिक्षक विरोध सप्ताह मना रहे है। विरोध सप्ताह के पहले दिन जहां सेवाशर्त को प्रति, मुख्यमंत्री के पुतला, उपमुख्यमंत्री के पुतला का दहन किया गया वही दूसरे दिन टिवीटर कैम्पिंग और तीसरे दिन फेसबुक ट्रेंड चलाकर शिक्षको ने विरोध जताया। चौथे दिन प्रखण्ड स्तरीय बैठक की गई और पांचवे दिन जिलास्तर की बैठक ऑनलाइन जिलाध्यक्ष प्रमोद मंडल की अध्यक्षता में औऱ कार्यकारिणी सदस्य सोनू मिश्रा के संचालन में सम्पन्न हुई। आगामी कार्यक्रम के विषय मे बताते हुए जिलाध्यक्ष प्रमोद मण्डल ने बताया कि सोमवार को प्रदेश कमेटी की बैठक होगी तथा मंगलवार को एकदिवसीय बेबीनार का आयोजन किया जाएगा और बुधवार को जिला के हजारों शिक्षक प्रोटेस्ट विथ फैमिली कार्यक्रम के तहत अपने पत्नी, बच्चों के साथ घर बैठे ऑनलाइन सेवाशर्त का विरोध करेंगे।

तथा पांच सितंबर को पूरे प्रदेश के शिक्षक बदला लो बदल डालो का संकल्प लेंगे। जिला स्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष प्रमोद मण्डल, कार्यकारी महासचिव रंजीत यादव, प्रवक्ता धनन्जय झा, कोषाध्यक्ष शिबली अंसारी ने बताया कि उनकी लड़ाई मात्र शिक्षको के वेतन वृद्धि की नही है उनकी लड़ाई समाज के गरीब तबके के युवा, छात्र और नौजवान जो कल शिक्षक बनेंगे उनकी भी है। शिक्षक बनने के लिए उन तमाम प्रतिमानों को पुनः स्थापित करवाने की है जिससे कल कोई भी युवक बाय चांस नही बाय चॉइस शिक्षक बने। शिक्षको की लड़ाई में समाज के युवा छात्र और नौजवान की भागीदारी सुनिश्चित हो। वही संघ के जिला उपाध्यक्ष राशिद अनवर, डा रणधीर राय, अरुण यादव, जिला सचिव मो ताजुद्दीन, राजीव पासवान ने बताया कि सरकार शिक्षको को अपमानित करके एवं उनके ऊपर फाइलों का बोझ लादकर समाज के गरीब तबकों को शिक्षा से दूर करना चाहती है। सरकार की मंशा साफ जाहिर हो रही है कि बत्तीस लाख छात्रों में से सवा लाख उत्तीर्ण शिक्षको को अपमानित करके बिहार की प्रतिभा का खुलेआम अपमान कर रही है मतलब साफ है कि बिहार में प्रतिभा का कोई स्थान नही है। अगर स्थान होती तो आज बिहार में टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक नियोजनवाद का दंश नही झेलते बल्कि अन्य राज्यों के भांति उन्हें सहायक शिक्षक का दर्जा मिला होता।

वही संघ के कार्यकारिणी सदस्य सोनू मिश्रा, प्रवीण नायक, रंजन पासवान, वलिउर रहमान खा ने बताया कि उनकी लड़ाई शिक्षक शिक्षा और शिक्षालय को बचाने की है। उनका सँघर्ष शिक्षालय को योजनालय बनने से बचाने को है। जब जब सरकार शिक्षा बर्बाद करने की साजिश रचती है शिक्षक और समाज के बुद्धिजीवी आगे आकर उसका प्रतिकार करते है और अभी भी सरकार की योजना है कि सरकारी विद्यालयों को बर्बाद किया जाए औऱ उसे बेच दिया जाए जिसका हम प्रतिकार करते है। बैठक में बिरौल के अध्यक्ष मुकेश पौद्दार,सचिव जगन्नाथ झा, गौड़ा बौराम के अविनाश सिंह,सदन चौपाल कुशेश्वरस्थान के सजंय साहू, अशोक यादव, पूर्वी के मनोज राय,बबलू कांत झा, घनश्यामपुर के चितरंजन कुमार,बेनीपुर के गोपाल कृष्ण झा, रविन्द्र लाल रमण, अलीनगर लक्ष्मण साफी, बहादुरपुर से जीशान जया, एजाज अहमद, बहेड़ी से उपदेश पौद्दार, हायाघाट से चन्दन झा,सिंहवाड़ा से मुकेश कुमार, जाले से प्रमोद कुमार, केवटी से वसीम अहमद, किरतपुर से सत्यनारायण साहू, मनीगाछी से अमित कुमार, महाराज शैलेंद्र कुमार, तारडीह से शुशील सिंह महताब आलम, सदर से विजय कुमार ने शिरकत कर अपना विचार रखा।

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