प्रेस के मामले में विश्व में भारत 136 वें पायदान पर, ऊपर उठने को आत्ममंथन की जरूरत

प्रेस के मामले में विश्व में भारत 136 वें पायदान पर, ऊपर उठने को आत्ममंथन की जरूरत :

कमिश्नर

 

सही प्रतिनिधि चुनने के लिए जनता को सही सूचनाएं देकर सहयोग करे मीडिया : वीसी

 

कलम के सिपाहीयों ने अपना एजेंडा तय नहीं किया तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी : एसएसपी

 

मीडिया की भूमिका के बिना लोकतंत्र सफल हो ही नहीं सकता,आजादी के बाद सशक्त लोकतंत्र की स्थापना में मीडिया की अहम भूमिका रही : संजय सरावगी

 

दरभंगा । इतिहास गवाह है कि जब-जब प्रेस पर रोक लगी है, शासन पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। स्वतंत्रता इतिहास पर गौर करें तो देखते हैं कि लार्ड कर्जन ने प्रेस का दमन किया, अंग्रेजों ने वर्नाकुलर प्रेस एक्ट लाया, नतीजा सामने है कि स्वतंत्रता दिलाने में प्रेस ने अहम रोल अदा किया। आजादी के बाद प्रेस की स्वतंत्रता को नागरिकों के मूल अधिकार में अनुच्छेद 19 के तहत समाहित किया गया। एलएनएमयू के प्रबंधन भवन मंे बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की ओर से “लोकतंत्र की सफलता में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित सेमिनार का उद्घाटन करने के बाद प्रमंडलीय आयुक्त मयंक बरबड़े ने यह बातें कही। उन्होनें कहा कि देश की मीडिया संवेदनशील व

परिपक्व है। हालांकि फ्रीडम प्रेस इंडेक्स के अनुसार प्रेस के मामले में हम अभी विश्व में 136 वें पायदान पर हैं, इससे ऊपर उठने के लिए आत्ममंथन की जरूरत है। सेमिनार में एलएनएमयू के वीसी प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह

ने कहा पहले हमें तय करना होगा कि प्रजातंत्र की सफलता के क्या मापदंड हो सकते हैं, तब इसमें मीडिया की भूमिका की विवेचना होनी चाहिए। लोकतंत्र को जनता के लिए जनता के हित में बताया जाता है, यह तभी संभव है जब जनता विवेकपूर्ण निर्णय लें। मीडिया की भूमिका है कि वह जनता को सही प्रतिनिधि चुनने के लिए सही ज्ञान दें। मीडिया अगर सही सूचना जनता तक नहीं पहुंचाएगी तो वे सही प्रतिनिधि नहीं चुन सकेंगे। ऐसे में लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता। दरभंगा में अपने डेढ़ वर्षों के कार्यकाल में मीडिया को कभी पक्षपाती होते नहीं देखा, यह सुखद अनुभव है। नगर विधायक संजय सरावगी ने कहा कि मीडिया की भूमिका के बिना लोकतंत्र सफल हो ही नहीं सकता। आजादी के बाद सशक्त लोकतंत्र की स्थापना में मीडिया की अहम भूमिका रही। कोई जनजागरण मीडिया के सहयोग के बिना संभव नहीं। सोशल मीडिया के कारण गुणवत्ता व विश्वसनियता में गिरावट आई है। भ्रामक तथ्यों को फेसबुक आदि सोशल साइट पर परोसा जा रहा है, ऐसी गतिविधियों व तत्वों के प्रति मीडिया को गंभीर होने की जरूरत है। यूनियन से जुड़ी बीबीसी पटना की

संवाददाता सीटू तिवारी ने मीडिया में महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव पर प्रहार करते हुए कहा कि आज की मीडिया के प्रति सोच में बदलाव आया है। लोकतंत्र में मीडिया के रोल पर प्रकाश डालते हुए उन्होनें कहा कि सच को पेश करना, पक्षपात ना करना और अफवाहों के प्रचार से बचना मीडिया की अहम भूमिका है। मीडिया में विज्ञापन के बाजार के दबाव को चिंताजनक बताते हुए कहा कि आज भारत सहित कई देशों में ऐसा माहौल बना है जहां सरकार मीडिया मैनेजमेंट को मैनेज कर रही है। उन्होनें कहा कि मीडिया सोच का निर्माण करती है, ऐसे में महिलाओं से संबंधित खबरों को लिखते समय शब्दों के चयन में हमें सावधानी बरतनी चाहिए।

एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि जिस तरह देश आजाद हुआ, समानांतर रूप से भारतीय मीडिया उसी गर्भ से पीड़ा के साथ उत्पन्न हुआ और लोकतंत्र को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। हिन्दुस्तानियत के निर्माण में, देश के रूप में हम जिंदा हैं तो मीडिया की भूमिका के कारण ही। आज लोकतंत्र व मीडिया, दोनों अजीब दौर से गुजर रहो है। लोकतंत्र में दलगत राजनीति है, सरकार बनाने की चिंता रहती है। मीडिया के लिए संकट यह है कि वह स्वतंत्र रूप से यह चयन नहीं कर पा रहा कि उनका एजेंडा क्या है। अगर कलम के सिपाहीयों ने अपना एजेंडा तय नहीं किया तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन (आईजेयू) के राष्ट्रीय सचिव अमर मोहन प्रसाद ने कहा कि वर्तमान में जो स्थिति है, मीडिया मैनेजमेंट जिस प्रकार सरकार की चाटुकारिता में लगी है, मीडिया की स्वतंत्रता संदिग्ध हो चुकी है। आईजेयू के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शिवेन्द्र सिंह ने कहा कि संगठन में बल होता है। पत्रकारों से संगठित होने की अपील करते हुए उन्होनें आश्वस्त किया कि पत्रकारों के हित की सुरक्षा के लिए यूनियन सदैव तत्पर है और हमेशा रहेगा। अध्यक्षता करते हुए एमबीए विभाग के निदेशक व पूर्व पत्रकार प्रो. एचके सिंह ने पत्रकारिता से जुड़े कई संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि पत्रकारिता तलवार पर चलने के समान हैं। उन्होनें सभी पत्रकारों से एकजुट होने की अपील किया । इससे पूर्व मिथिलांचल की परंपरा के अनुसार सभी अतिथियों का पाग,चादर व मोमेंटो से स्वागत किया। स्वागत भाषण पत्रकार शशिमोहन भारद्वाज ने किया । संचालन विजय श्रीवास्तव ने किया। सेमिनार के दौरान दरभंगा के कई दिवंगत व वरिष्ठ पत्रकारों को पत्रकारिता में उनके उत्कृष्ठ योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले पत्रकारों में स्व. चन्द्रदेव नारायण सिन्हा, स्व. राम गोविन्द गुपता, स्व. ईश्वर दत्त तिवारी, और मदन मोहन चौधरी, दयानंद झा, शौकत खलील, विनय कुमार झा, हरि नारायण सिंह, डॉ. सतीश सिंह, डॉ. मुश्ताक अहमद, डॉ. कृष्ण कुमार, निशिकांत, मनोरंजन ठाकुर, अमरनाथ चौधरी, विनोद कुमार, पुनीत कुमार सिन्हा व अमलेन्दु शेखर पाठक शामिल है।

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