प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी बहादुरपुर के पत्र से शिक्षकों में आक्रोश

*★शिक्षकों को जलील करने का कोई भी मौका नही छोड़ते प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी बहादुरपुर:- प्रमोद मण्डल*

*★प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी बहादुरपुर के पास शिक्षकों की योग्यता मापने का पैमाना क्या है?:-धनन्जय झा*

*★शिक्षकों में फूट डालने की साजिश कर रहे है प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी बहादुरपुर:-सोनू मिश्रा*

दरभंगा. आये दिन पदाधिकारी के द्वारा शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने से सम्बंधित पत्र जारी होता रहा है। कभी बाढ़ आपदा के नाम पर तो कभी कोरोना के नाम पर शिक्षकों के बगैर प्रशासन और शिक्षा विभाग को कोई भी कार्य पूर्ण करने में निरन्तर कठिनाई होती रही है।जिला में किसी भी प्रकार के आपदा का कार्य हो तो स्थल पर जाकर बखूबी विभागीय निर्देशों का पालन करते रहें है।हाल फिलहाल में क्वारंटाइन सेंटर का उदाहरण ले या फिर वर्तमान में चल रहे सामुदायिक किचन शिक्षक पूरी तन्मयता के साथ बगैर अपनी परवाह किये दरभंगा जिला के सुदूरवर्ती इलाको में निरन्तर कार्यो को अंजाम दे रहे है। ऐसे में प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी बहादुरपुर के द्वारा वृक्षारोपण अनुश्रवण दल के गठन में शिक्षकों के पदनाम में नियोजित अथवा सहायक शिक्षक के बदले योग्य शब्द के प्रयोग करने पर शिक्षक संगठनों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते आक्रोश प्रकट किया है। टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के जिला अध्यक्ष प्रमोद मण्डल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि पूर्व में भी बीईओ बहादुरपुर की कार्यशैली संदिग्ध रही है कई बार उच्च स्तरीय पदाधिकारी को पत्र लिखकर उनके विरुद्ध जांच की मांग संघ के स्तर से किया गया है लेकिन वरीय पदाधिकारी की कृपादृष्टि से उनपर जांच तो दूर अबतक कोई पत्र भी निर्गत नही हुआ है। पूर्व में भी उन्होंने खण्ड खण्ड में वेतन विपत्र भेजकर एवं महीनों तक एरियर के विपत्र को लटकाकर अपना वास्तविक चेहरा शिक्षको के मध्य उजागर किया है।और वर्तमान में उनके द्वारा जारी किया गया पत्र जिसमे शिक्षकों के पदनाम के आगे योग्य जोड़कर वे शिक्षक समाज को जलील करना चाहते है। यह समझ से परे है कि उनके नजर में महज वही शिक्षक योग्य है जो उनके साथ अनुश्रवण में रहे और सभी अयोग्य हो गए। अगर उन्होंने शिक्षक समाज से माफी नही मांगी तो हमलोग आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। वही जिला प्रवक्ता धनन्जय झा ने कहा कि बीइओ बहादुरपुर बताए कि शिक्षकों के योग्यता मापने का कौन सा पैमाना उनके पास है और किस प्रकार के शिक्षक उनके पैमाने पर खड़े उतरते है। उनके नजर में योग्य कौन है जो विद्यालय में शिक्षण कार्य करते है या जो उनके साथ अनुश्रवण में रहते है।अब विभाग को भी चाहिए कि बीइओ के नाम के साथ योग्य बीइओ और अयोग्य बीइओ शब्द का प्रयोग करें। शिक्षकों के मूलभूत कार्यो पर तो उनका कभी ध्यान रहा नही लेकिन शिक्षकों को जलील करने का कोई भी अवसर वे नही छोड़ना चाहते है। वही संघ के जिला कार्यकारिणी सदस्य सोनू मिश्रा ने कहा कि मुझे तो हंसी आ रही है बीइओ के पत्र को देखकर। नियोजित शिक्षक, नियमित शिक्षक और अतिथि शिक्षक तो पदनाम हमलोगों में सुना है लेकिन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने तो विभाग के मार्गदर्शन से हटकर एक नए पद का सृजन कर दिए योग्य शिक्षक। अब वे ही बताए कि ये योग्य शिक्षक कौन है?और उन्होंने किस पैमाना पर महज तीन शिक्षक को योग्य माना है।सरेआम यह प्रखण्ड के सैकड़ो शिक्षकों के मान सम्मान के साथ खिलवाड़ है। और वे हम शिक्षकों के बीच मे फुट डालना चाहते है। क्या जो शिक्षक बाढ़ की पानी मे तैरकर सामुदायिक किचन चला रहा है वह योग्य नही है या जो विद्यालय में जाकर शिक्षण कार्य करते है वे योग्य नही है।अगर उनके पास कोई पैमाना है तो वे विभाग को बताए कि शिक्षकों की योग्यता निर्धारण का कौन सा पैमाना उनके पास है अन्यथा शिक्षकों के पदनाम के साथ छेड़छाड़ बन्द करें।

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