उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच में सुपर स्पेशिलिटी सेवाएं लगातार दम तोड़ रही हैं

DMCH के आंख विभाग में फेको मशीन खराब होने से मरीज से लेकर पीजी छात्रों को हो रही है परेशानी इस वजह से आधुनिक तकनीक से इलाज कराने के लिए मरीजों को निजी अस्पताल व नर्सिंग होम का रुख करना पड़ रहा है. हजारों की राशि खर्च कर मरीज अपना इलाज कराने का मजबूर हैं.

डीएमसीएच के आंख विभाग में फेको तकनीक से ऑपरेशन लम्बे समय से बंद है. फेको मशीन के खराब हो जाने के कारण पुरानी पद्धति से मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जा रहा है. विभागाध्यक्ष मशीन ठीक कराने के लिए कई बार गुहार लगा चुके हैं. बावजूद इसके उनकी कोई सुन नहीं रहा है.

मशीन की वारंटी कुछ महीनों में समाप्त होने वाली है. इस दौरान मशीन दुरुस्त नहीं करायी गई तो आगे चलकर उसकी मरम्मत में और भी ज्यादा परेशानी उठानी पड़ सकती है. मालूम हो कि मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आंख विभाग में बीएमएसआईसीएल द्वारा वर्ष 2016 में 22 लाख रुपये लागत से फेको मशीन की आपूर्ति की गई थी.
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मशीन लगने के बाद मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए फेको की आधुनिक सुविधा मिलने लगी. आसपास के जिलों के अलावा नेपाल के तराई इलाके से भी ऑपरेशन कराने के लिए मरीज यहां पहुंचने लगे. हालांकि कुछ महीनों में मशीन के अचानक खराब हो जाने से विभाग में यह सुविधा ठप पड़ गई.

डीएमसीएच के आंख विभाग की फेको मशीन खराब हो जाने से आंख विभाग के पीजी छात्रों को भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. ऑपरेशन ठप हो जाने से वे मोतियाबिंद के ऑपरेशन की आधुनिक तकनीक सीखने से वंचित हो गए हैं.

वहीं, आंख विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार की माने तो उन्होंने फेको मशीन को लेकर कई बार बीएमसीआईसीएल को पत्र लिखकर मशीन ठीक कराने का अनुरोध किया. लेकिन अभी तक फेको मशीन ठीक कराने की दिशा में अभी तक कोई पहल नहीं की गई है.

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