मंगल,शुक्र के साथ 12 भाव मे रहे तो स्तन कैंसर की संभावना: झा

Darbhanga Medical

इसमाद फाउंडेशन की ओर से आचार्य रमानाथ झा हैरिटज सीरीज के तहत 12 माह 12 व्‍याख्‍यानमाला में धरोहर व्‍यक्तित्‍व मिथिला की बेटी और भारत की पहली महिला चिकित्‍सक डॉक्‍टर कादम्‍बनी गांगुली पर व्याख्यान माला आयोजित की गई।

विश्‍व कैंसर सप्‍ताह के मौके पर ”भारतीय ज्‍योतिष दृष्टियों से कैंसर रोग का विश्‍लेषण” विषय पर गांधी सदन के सभागार में आयोजित इस व्याख्यान माला के मुख्‍य अतिथि प्रो सुरेंद्र कुमार सिंह, कुलपति, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने कहा कि ज्योतिष विज्ञान से हम कैंसर का इलाज़ तो नही लेकिन बचाव जरूर कर सकते है। ज्योतिष हमें कैंसर से होनेवाली तकलीफ का पूर्वानुमान देता है और हम शुरूवाती लक्षणों में ही इसके इलाज की प्रक्रिया शुरू कर सकते है।

जबकि मुख्यवक्ता के रूप में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, महावीर कैंसर संस्‍थान, पटना के डॉ. राजनाथ झा थे । अपने व्याख्यान में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, महावीर कैंसर संस्‍थान, पटना के डॉ. राजनाथ झा ने कैंसर जैसे भयावह बीमारी के विषय मे बताया कि इसकी उपादेयता यह है कि की पूर्व काल मे किसी जातकों की कुंडकी देखी जाय तो ज्योतिष विज्ञान में यह परोपकारी होगा। वर्तमान मेडिकल विज्ञान इस बीमारी के लिए लाभदायक तो है ही परंतु अपने 300 कैंसर रोगियों पर शोध कर कहा कि ज्योतिष विज्ञान इस रोग को ग्रहों के कारण पूर्व से ही पता लगाया जा सकता है। डॉ. झा ने ग्रहों की विवेचना करते हुए कहा कि ब्लड कैंसर के लिये मंगल ब्रेस्ट कैंसर के लिए शुक्र लिवर के लिए शुक्र
तथा चंद्रमा, राहु, शनि भी कैंसर रोग के प्रमुख प्रभावी ग्रह माने गए है। शुक्र एवं चंद्रमा जल तत्व ग्रह भी कैंसर रोग में सबसे ज्यादा प्रभावी है। क्योंकि शरीर में जल तत्व का अभाव एवं दूषित जल सेवन से भी कैंसर रोग उत्पन्न होता है। राहु घाव उत्पन्न करता है। मंगल रक्त को दूषित करता है तथा शनि घाव को सराकर विकृत रूप प्रदान करता है । अतः जन्मकुंडली में इन ग्रहों का योगायोग विचार कर मनुष्य के जीवन मे होनेवाले असाध्य रोग कैंसर की जानकारी पूर्व में ही ज्यातिष विज्ञान के दृष्टि से प्राप्त की जा सकती है। बहुत सारे कैंसर रोगियों के कुंडकी का अनुसंधानात्मक अध्यन कर डॉ. राजनाथ झा ने किया और ये बातें कही। इस रोग के निदान के लिए पूर्व काल मे आचार्यों ने बहुत सारे निदान प्रदान किया है । जैसे बहुत प्रकार के वैदिक एवं दैविक पेड़ों को लगाना एवं नित्य क्रिया से सूर्योपासना के साथ जल देना आदि इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है। व्‍याख्‍यान समारोह की अध्‍यक्षता करते हुए श्री गजानन मिश्र, पूर्व भा.प्र. ने कहा कि मिथिला की जीवन शैली ही रोग का निदान है । उन्होंने कहा कि मिथिला का खान पान , मिथिला का पानी रोग रोधी शरीर देता था। लेकिन आज मिथिला कैंसर रोगियों का गढ़ बनता जा रहा है।

कार्यक्रम में अध्यक्ष, छात्र कल्याण डॉ. रतन कुमार चौधरी, कुलसचिव कर्नल निशीत कुमार रॉय, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान डॉ. इंद्र कुमार रॉय, विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग डॉ. चंद्रभानु प्रसाद सिंह, डॉ. रमण झा स्नातकोत्तर मैथिली विभाग, राज पुस्तकालय के डॉ. भवेश्वर सिंह, अध्यक्षया संगीत एवं नाट्य विभाग डॉ. लावण्य कीर्ति सिंह काव्या, महाराजाधिराज कामेश्‍वर सिंह कल्‍याणी फाउंडेशन के सीइओ श्रुतिकर झा, डॉ. मंज़र सुलेमान, रेलवे समस्तीपुर के सी.डीएमई अमन राज, सीनियर सेक्शन ऑफिसर गंगा राम महतो एवं विश्वविद्यालय की कई कर्मी आदि उपस्थित रहे।

मंच संचालन करते हुए संतोष कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम में एक मंच पर प्रबंधन, विज्ञान और ज्योतिष का समायोजन कैंसर जैसे गंभीर बीमारी के विषय मे सही में महत्वपूर्ण जानकारियों का एक समायोजन इस कार्यक्रम की विशेषता रही। फाउंडेशन इस प्रकार ही अगले दस महीने में अपने अलग प्रकार के विषयों एवं विद्वानों को व्याख्यान में लेकर आएगा। कार्यक्रम का धन्यवादज्ञापन अवकाश प्राप्त ओ.एस. बिहार विधान परिसद के रमन दत्त झा ने किया।

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